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HOW TO OVERCOME CRISIS IN STONE TRADE



गत् कुछ समय से भारतीय स्टोन व्यापार विशेष तौर पर मार्बल व्यापार भारी मन्दी की मार सहन कर रहा है। इसके चलते कई मार्बल व्यापारियों के कारोबार बन्द होने की कगार पर हैै या भारी नुकसान से पिडि़त है। इस विषय पर एक प्रश्न ’’स्टोन हेल्प लाइन ग्रुप’’ द्वारा ‘व्हाट्सअप’ पर ‘महामन्दी से कैसे उभरे मार्बल व्यापार’ को वायरल किया गया जिसके कई आश्चर्यजनक उत्तर मिले इन उत्तरों में सरकारी तन्त्र को कही भी दोषी नहीं पाया गया तथा मन्दी के लिए मुख्य रूप से व्यापारियों को ही जिम्मेदार ठहराया गया। इसी के साथ कई व्यापारियो ने मन्दी से उभरने के उपाय सुझाए। उपरोक्त प्रश्न के उत्तर तथा निदान निम्न हैः-

1. मार्बल उद्योग के सभी व्यापारी मन्दी से ग्रस्त नहीं है पर अधिकांश व्यापारी परेशान है। इस हेतु आवश्यक है कि: 

 • पारम्परीक (Traditional) व्यापार पद्धति में हम बदलाव लावंे तथा मूल्य-संवर्धन उत्पाद (Value Added Products)  पर विशेष ध्यान दें। उत्पादों (Products) को विशिष्ठ फिनिशेज़ (Finishes) के साथ ही विभिन्न स्वरूपों में निर्मित करें। इससे उत्पादों की मूल्य वृद्धि होगी तथा मांग भी बढ़ेगी।

   ऽहमें आज एक निश्चित अन्तराल में कोन्फरेन्स (Conference) तथा सेमिनारों (Seminars) के आयोजनों की आवश्यकता है, जिनमें निम्न विषय पर गहराई से सोचा जाए किः

1. हम उत्पादों की लागत कैसे कम करें।

2. हम बाजार में उपलब्ध अन्य फ्लोरिंग प्रोडेक्ट्स से कैसे मुकाबला करें तथा मार्बल को उनसे कैसे स्पर्धी बनावे।

3. हम कैसे ‘रेडी टू फिक्स’ टाईल्सों का उत्पादन करें तथा उनको बाजार मंे उपलब्ध विभिन्न उत्पादों के मुकाबले स्पर्धी बनावे।

4. हम कैसे मार्बल उत्पादों की बिक्री तथा निर्यात बढ़ावे। 

2. निष्पक्ष ऐजेन्सी की नियुक्तिः श्री अरूण अग्रवाल(राजस्थान उद्योग) का मानना है कि बाजार में जारी मन्दी से कैसेे उभरें तथा इस मन्दी के क्या कारण है, विषय पर अध्ययन एक निष्पक्ष विशेषज्ञ ऐजेन्सी को नियुक्त करना चाहिए। इस ऐजेन्सी से प्राप्त रिपोर्ट पर व्यापारियों को गहनता से विचार विमर्श करना चाहिए तथा उपयुक्त सुभावों को बाजार द्वारा स्वीकार कर उनको कार्य रूप देना चाहिए।

ऽ मन्दी का एक कारण प्रोपर्टी बाजार में भी मन्दी है तथा फ्लेट्स, बंगलो की बिक्री  में भी भारी गिरावट देखने को मिल रही है।

ऽ ऊँची ब्याज दरों के कारण बाजार में धन की तरलता (Liquidity) में कमी आयी हैं।

ऽ स्ंासार के कई देश अभी भी मन्दी के दौर से गुजर रहे है।  

उपरोक्त के साथ ही निम्न सुझाव भी है: 

  ऽ मार्बल को उसके प्राकृतिक स्वरूप में भी विक्रय करना चाहिए। आज मार्बल जो रंग की पुताई करके बेचा जा रहा है यह प्रवृति सम्पूर्ण बाजार के लिए हानिकारक सिद्ध हो रही है। रंग किया हुआ मार्बल कुछ ही अन्तराल में रंग छोड़ देता है तथा भद्दा दिखने लगता है। जबकि प्राकृतिक स्वरूप का मार्बल इसकी पूर्ण उम्र तक एक समान दिखता है। इस प्रकार के आषिंक लाभ की एक व्यापारी की प्रवृति को अन्य व्यापारियों द्वारा रोकना चाहिए। क्योंकि यह प्रवृति केन्सर की तरह बढ़ रही है तथा बाजार को अवरुद्ध कर रही है तथा मन्दी को आमन्त्रित कर रही है। इसका परिणाम आज हम ग्रीन मार्बल की बिक्री में देख रहे है तथा अति शिघ्र राजस्थानी ब्लेक ग्रेनाइट मंे भी देखेंगे।

  ऽ आज ग्रेनाइट एवं सफेद मार्बल पर भी रंग-रोगन की विधी इतनी विकसित हो गयी है कि किसी भी ग्रेनाइट का रंग परिवर्तित कर अन्य ग्रेनाइट का स्वरूप दिया जा सकता है, जैसे पाली के खण्डवा रेड को ललितपुर रेड ग्रेनाइट में परिवर्तित करके ऊँचे दामों पर बेचा जा रहा है। यह विधी अन्य ग्रेनाइट्स के रंग परिवर्तन के लिए भी उपयोग हो रही है। काले दाग वाले सफेद मार्बल स्लेब्स के सरफेस को बिना दाग के सफेद मार्बल में परिवर्तित किया जा रहा है। लेकिन यह रंग-रोगन लम्बे समय तक नहीं टिकते। विक्रय करने में आसानी, ऊँचे दाम का लालच अन्तोगत्वा मन्दी को ही निमन्त्रण है। एक ठगाया हुआ ग्राहक कई ग्राहकों को बिगाड़ता है जिसका विपरित असर बाजार को प्रभावित करता है। अगर यह प्रक्रिया लम्बे समय तक जारी रखी जाएगी तो स्टोन व्यापार की स्थिति पर ही प्रश्न चिन्ह लग जाएगा।

ग्राहकांे को झूठ बताकर गलत माल बेचना आज कई व्यापारियों की ‘शान‘ बन गया है। ऐसे व्यापारियों के कारण बाजार पर विपरित असर पड़ रहा है तथा ग्राहकों के मध्य यह सन्देश जा रहा है कि सभी मार्बल व्यापारी झूठे तथा ठग है। 

1. आज दिन-प्रतिदिन बहु-मजिंली इमारतों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है इन ईमारतो में ‘रेडी टू फिक्स’ (Ready to Fix) सेरेमिक (Ceramic) तथा विट्रिफाइड टाईल्सों (Vitrified Tiles) का प्रचलन बढ़ रहा है। ये टाईल्से वजन मंे जहां हल्की होती है वहीं इनकों शिघ्रता के साथ फिक्स भी किया जा सकता हैं।  

 इस प्रचलन को प्रतिस्पर्धा देने के लिए आज भी ‘रेडी टू फिक्स’ मार्बल टाईल्सों का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। जबकि इसकी महत्ती आवश्यकता है। आज अधिकांश मार्बल का उपयोग ‘विला‘ तथा ‘बंगलों‘ तक ही  सिमट कर रह गया है जहां पर इस उत्पाद को आयातित मार्बल्स(Imported Marbles) तथा ग्रेनाइट्स (Granites) से मुकाबला करना पड़ रहा है। ऐसे में मार्बल का वृहद उपयोग कैसे हो इसकी तकनिकी पर विचार करना आवश्यक है। 

2. यह भी सोचनिय बिन्दु है कि मांग से अधिक उत्पादन के कारण दरों को कम करने का दबाव मार्बल की प्रोसेसिंग गुणवत्ता में कमी (मार्बल स्लेब्स को पतले से पतला करते जाना) ला रही है। इसका विपरित परिणाम यह हो रहा है कि ग्राहक दुसरा विकल्प तलाश कर रहा है या एक बार ठगाने के बाद पुनः मार्बल उपयोग के प्रति निराश हो रहा है। साथ ही वो मिलने वालो, दोस्तो तथा परिचितों को भी मार्बल उपयोग हेतु हतोत्साहित कर रहा है।

3.  आज हमारे पास उच्च गुणवत्ता (High Quality) वाले विभिन्न रंगो के ग्रेनाइट, मार्बल एवं सेण्डस्टोन्स उपलब्ध है, आवश्यकता मात्रा इतनी सी है कि इसकी उत्तम प्रोसेसिंग हो तथा इनका विभिन्न स्वरूपों में निर्माण हो। इससे निश्चित ही बिक्री के साथ निर्यात बढ़ेगा।

4.  श्री संजय शर्मा के अनुसार आज मार्बल उद्योग में लगी पूँजी का बहाव अन्य क्षैत्रों मे हो रहा है, जिनमें से कई क्षैत्र ऐसे है जहां पूँजी जाम हो जाती है या अनउपयोगी हो जाती है। ऐसे में मार्बल व्यापारियों को व्यापार से उतनी ही पूँजी निकालनी चाहिए जिससे उनका व्यापार अवरुद्ध न हो। कई व्यापारियों की इस प्रवृति के कारण आपूर्तिकत्ताओं तथा सेवाकर्मियों को समय पर भूगतान नहीं मिलता है। इससे पूरे मार्बल व्यापार की ख्याति पर विपरित असर पड़ता है। समय पर भुगतान नहीं होने के कारण मार्बल उद्योगों में आपूर्तिकत्र्ता कम गुणवत्ता का माल सप्लाई करते है वह भी ऊँचे दामों पर। इससे जहां माल निर्माण की लागत बढ़ती है वहीं माल की गुणवत्ता भी कम हो जाती है। 

5. ‘जो फिट है वही हिट है’, श्री संदीप गुप्ता के अनुसार मार्बल इण्डस्ट्री आज काॅन्सोलिडेशन फेज़ में जा रही है। आज एक ग्राहक के पास ‘फ्लोरिंग’ करने के कई विकल्प खुले हुए है जैसेः आयातित मार्बल, विट्रिफाइड, सेरेमिक टाईल्स, वुड टाईल्स, सिन्थेटिक मार्बल आदि।

   इसी के साथ ग्राहको में हम एक नई प्रवृति का उदय भी देख रहे है कि वो एक निश्चित अन्तराल (लगभग 5 वर्ष) के बाद अपनी फर्शी बदलना चाहते है। ऐसे में हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम इस बदलती माँग के अनुरूप अपने को ढ़ाले तथा मार्बल इण्डस्ट्री को बचावें क्योंकि आज ‘जो फिट है वो हिट है’।  

6. उपरोक्त के साथ ही विट्रीफाइड एवं सिरेमिक टाईल्स उद्योग में यह टेªण्ड देखा जा रहा है कि एक शोरुम मालिक विट्रिफाइड कम्पनी के प्रोडेक्ट्स अपने यहां प्रदर्शित (Display) कर देता है तथा ग्राहकों द्वारा आर्डर आने पर कम्पनी के ‘वेयरहाउस‘ पर फोन करके ग्राहकों को भिजवा देता है। ऐसे में व्यापारी को बिना पूँजी निवेश (Investment) किये कमीशन मिल जाता है। यह टेªण्ड बड़े मार्बल व्यापारी भी ‘रेडी टू फिक्स’ टाईल्सों का उत्पादन करके प्रारम्भ कर सकते है।

उपरोक्त के साथ ही निम्न उपाय भी मन्दी से लड़ने में सहायक सिद्ध हो सकते है:

1. आई.टी.आई. संस्थान: मार्बल उद्योग के लिए आज एक आई.टी.आई. संस्थान के संचालन से योग्य आॅपरेटर्स तथा मिस्त्रीयों की उपलब्धता बढ़ेगी जिससे मशीनों की कार्य कुशलता में वृद्धि होगी। इसके परिणाम स्वरूप उत्पादों की लागत कम आएगी तथा उत्पाद श्रेष्ठ होगा।

2. मार्बल एसोशिएसनों को कई प्रकार के मेलों (स्टोन का ही मेला हो आवश्यक नहीं) में भाग लेकर मार्बल उत्पादों का प्रदर्शन करना चाहिए। इससे मार्बल की माँग बढ़ेगी तथा मार्केटिंग खर्च में कमी आएगी। क्योंकि जो दिखता है वही बिकता है।

3. मार्बल व्यापार में ‘प्रोफेशनल पद्धिति’ का समावेश करते हुए इसको अधिकाधिक पारदर्शी बनाया जाए। इससे ग्राहकों का इस उद्योग के प्रति विश्वास बढ़ेगा तथा विक्रय ग्राफ में बढ़ोतरी होगी।

4. पूरी मार्बल इण्डस्ट्री को संयुक्त रूप से प्रिन्ट मिडीया, इलेक्ट्रोनिक्स मिडिया व सोश्यल मिडिया का उपयोग करना चाहिए। इस तकनिक से विट्रिफाइड टाईल्स से मुकाबला किया जा सकता है।

5. अन्तिम लेकिन अति उपयोगी कि उपरोक्त अधिकांश उपाय ‘संयुक्त प्रयास’ पर आधारीत है। एकल प्रयास उस लकड़ी के गठर के समान है जिसकी एक-एक लकड़ी को तो आसानी से तोड़ा जा सकता है लेकिन जैसे ही उनको ‘गठरी’ में बांध कर तोडा जाए तो वह कार्य दुष्कर हो जाता है।  

7. इसी के साथ यह बिन्दु भी महत्वपुर्ण है कि आज होलसेल व्यापारीयों एवं रिटेल व्यापारियों में आपसी सामन्जस्य एवं सूचना की कमी है। इसी के कारण अब रिटेल व्यापरी मार्बल के अतिरिक्त अपनी दुकान/गोदामों से कई अन्य फ्लोरिंग उत्पाद भी विक्रय कर रहे है तथा वही बेच रहे है जो ग्राहक मांग रहा है। ऐसे में होलसेल व्यापारीयों को कुछ ऐसी योजना बनानी चाहिए कि रिटेल व्यापारी मार्बल को अधिकाधिक बेचे। 

 

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